दिल के टुकड़े की असमय मृत्यु के बाद परिवार ने लिया ये बड़ा फैसला

दुख की घड़ी में धैर्य और समाज के प्रति जिम्मेदारी का एक ऐसी नजीर सामने आयी है, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। तिली निवासी कलूसेठ (रमेश चौरसिया) परिवार की बहु नाबिता किरण चौरसिया (मोना) और बेटे मिथलेश अनीता चौरसिया के घर 29 मार्च को जन्में नवजात शिशु का हृदय संबंधी समस्या के कारण असमय निधन हो गया। इस अपार दुख के बीच भी परिवार ने साहस दिखाते हुए गवेषणा NGO के सुझाव पर, अपने जिगर के टुकड़े की देह को बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज को दान करने का निर्णय लिया।
परिवार का कहना है कि “हमने अपना बच्चा खोया है, लेकिन उसकी देह पर मेडिकल छात्र रिसर्च कर सकेंगे और भविष्य के डॉक्टर कुछ नया सीखकर किसी अन्य परिवार को ऐसा दिन देखने से बचा सकेंगे।”
गवेषणा NGO का संकल्प:
संस्था ‘गवेषणा’ इस पुनीत कार्य में परिवार के साथ खड़ी रही। अध्यक्ष मनोहर लाल चौरसिया ने कहा कि इस तरह की समझदारी ही चिकित्सा विज्ञान के विकास और मानवता की रक्षा का आधार है। गवेषणा परिवार के इस महान त्याग को नमन करती है। संस्था लगातार प्रयासरत है कि बीएमसी  में जल्द से जल्द अंग और ऊतक  प्रत्यारोपण की सुविधाएं पूर्ण रूप से विकसित हों, ताकि दान किए गए अंगों से दूसरों को नया जीवन मिल सके।यहां तक संस्था ने सुप्रीम कोर्ट में अंगदान को सरल बनाने हेतु एक जनहित याचिका  भी लगाई हुई है। संस्था के सचिव रमेश चौरसिया ने बताया कि स्थानीय लोगों के बीच देहदान और अंगदान को लेकर जागरूकता बढ़ी है साथ ही बीएमसी के एनाटॉमी विभाग के विभागाध्यक्ष समेत सभी सदस्यों के प्रति उनके सहयोग के लिए गवेषणा NGO ने आभार व्यक्त किया है।

प्रतीकात्मक AI जेनरेटेड तस्वीर
Pankajngz@123
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